रविवार, 4 अक्टूबर 2020

विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानन्द

विश्व धर्म महासभा के सम्मुख स्वामीजी अभिभाषण के संबंध यह कहा जा सकता है कि उन्होंने अपना भाषण आरंभ किया तो विषय था -- “हिन्दुओं के धार्मिक विचार”, किन्तु जब उन्होंने अंत किया तब तक हिन्दू धर्म की सृष्टि हो चुकी थी। इस सम्भावना के लिए समय भी परिपक्व हो चुका था। उनके सम्मुख उपस्थित विशाल श्रोता समूह पाश्चात्य विचारधारा का ही प्रतिनिधि था, लेकिन इसमें जो परमोत्कृष्ट विशेषता है, सब उस सब का कुछ विकास भी श्रोताओं में विद्यमान था। अमेरिका को और विशेष रूप से शिकागो को, जहाँ यह सम्मेलन हुआ, यूरोप के प्रत्येक राष्ट्र ने अपने मानवीय योगदान से आप्लावित किया। आधुनिक उद्योग और संघर्ष के बहुत कुछ उत्कृष्ट और उनमें से कुछ निष्कृष्ट भाव पश्चिम की इस नगरी की रानी की सीमाओ के भीतर मिलते हैं जिसे पदतल -- जब वह अपनी आँखों से उत्तर का प्रकाश पढ़ कर बैठती है और चिंतामग्न होती है -- मिशिगन झील के निकट आधुनिक ज्ञान में ऐसा बहुत कम है, यूरोप के अतीत में उत्तराधिकार में प्राय ऐसा बहुत कम है, जिसकी कोई ना कोई चौकी शिकागो की नगरी में विद्यमान ना हो। और जहाँ हममें से कुछ को इस केंद्र का जनसंकुल जीवन और अधीर विश्वृंखल ही क्यों ना प्रतीत हो, फिर भी इसमें कोई संदेह नहीं कि यह मानव की एकता के लिए किसी महान देश धीरसंचारी आदर्श को उस समय व्यक्त करने की चेष्टा कर रहे थे, जब उसकी परिपक्वता के दिन पूर्ण हो जाएंगे।

बहन निवेदता,
4 जुलाई 1907.



सूची

15 सितम्बर 1893 – हमारे मतभेद के कारण


डाउनलोड
 
डाउनलोड हिन्दी पीडीएफDownload English PDF

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा

मोहनदास कर्मचन्द गाँधी को जानने-समझने के लिए उनकी आत्मकथा से बढ़कर कोई अन्य साधन नहीं है। इस पुस्तक में गाँधी जी ने अपने जीवन की अनेक घटनाओं का सटीक वर्णन किया है। अपनी गलतियों या शर्मनाक घटनाओं को भी छिपाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। वस्तुतः इससे बढ़कर सत्य का प्रयोग और क्या हो सकता है!

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा महात्मा गाँधी के जन्म से लेकर 1921 की कथा है। इसका प्रकाशन 1925 से 1927 के बीच नवजीवन में साप्ताहिक किस्तों में हुआ। मूल रूप में गुजराती में लिखी आत्मकथा का हिन्दी अनुवाद गाँधी के सहयोगी काशिनाथ त्रिवेदी ने किया है। विश्व के धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं की एक समिति ने इस पुस्तक को 20वी शताब्दी की सर्वोत्तम 100 आध्यात्मिक पुस्तकों में शामिल है।

यह पुस्तक इन्टरनेट पर मुफ्त उपलब्ध है । 

सत्य के प्रयोग (पीडीएफ) को यहाँ से डाउनलोड कर सकते है।

ऑनलाइन पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।